इन योगाभ्‍यास से करें अपने दिन की शुरुआत, शरीर बना रहेगा लचीला


आज के लाइव योग सेशन (Live Yoga Session) में छोटे-छोटे कई अभ्यासों को करने के बारे में बताया और दिखाया गया. इसमें बटर फ्लाई आसन, जो पैरों की मजबूती को बढ़ाता है. कपालभारती (Kapalbhati) से लेकर हलासन और अनुलोम विलोम प्राणायाम अभ्यासों के बारे में बताया गया और इनके अभ्‍यास के फायदे भी बताए गए. इन आसनों को करने से मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है. साथ ही उसे हर तरह के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योगाभ्‍यास धीरे-धीरे करना चाहिए. अगर आप प्रतिदिन इसे करेंगे तो आपकी अपनी नियमित दिनचर्या में इसे आसानी से कर सकेंगे और इससे फायदा पा सकेंगे. इस लाइव योग सेशन में कई आसनों के जरिये शरीर को लचीला बनाने और हाथों, पैरों की मजबूती के लिए कई योगाभ्‍यास और आसान अभ्यास सिखाए गए.

बटरफ्लाई आसन:
बटरफ्लाई आसन को तितली आसन भी कहते हैं. महिलाओं के लिए ये आसन विशेष रूप से लाभकारी है. बटरफ्लाई आसन करने के लिए पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएं,रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएं. दोनों हाथों से अपने दोनों पांव को कस कर पकड़ लें. सहारे के लिए अपने हाथों को पांव के नीचे रख सकते हैं. एड़ी को जननांगों के जितना करीब हो सके लाने का प्रयास करें. लंबी,गहरी सांस लें, सांस छोड़ते हुए घटनों एवं जांघो को जमीन की तरफ दबाव डालें. तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे हिलाना शुरू करें. धीरे धीरे तेज करें. सांसें लें और सांसे छोड़ें. शुरुआत में इसे जितना हो सके उतना ही करें. धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं.

इससे फायदे: जाँघो, कटि प्रदेश एवं घुटनो का अच्छा खिंचाव होने से श्रोणि एवं कूल्हों में लचीलापन बढ़ता है. मासिक धर्म के दौरान होने वाली असुविधा एवं रजोनिवृति के लक्षणों से आराम. गर्भावस्था के दौरान लगातार करने से प्रसव में आसानी.

हलासन: हलासन को प्‍लो पोज Plow Pose भी कहा जाता है. खेती में उपयोग किए जाने वाले उपकरण हल के नाम पर इसका नाम हलासन रखा गया है. इसके करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने दोनों हाथों को शरीर से सटा कर रखें. हथेलियां जमीन की तरफ होनी चाहिए. अब सांस अंदर की ओर खींचते हुए अपने पैरों को ऊपर की ओर उठाएं. इससे दबाव पेट की मांसपेशियों पर पड़ेगा. अब अपनी टांगों को ऊपर की ओर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें. अब अपनी टांगों को सिर की ओर झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे की ओर ले जाएं. हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें. इसी स्थिति में करीब एक मिनट तक रहें.

हलासन के फायदे
हलासन पाचन सुधारने में मदद करता है.
इसे करने से रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है और कमर दर्द में आराम मिलता है.

यह शरीर का मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और यह वजन घटाने में भी प्रभावी है.
यह आसन डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्‍छा है. इसकी वजह यह है कि इसे करने से शुगर लेवल कंट्रोल होता है.

कपालभारती
कपालभारती बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात ‘कपालभारती’ वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभारती के फायदे
ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है. सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है.
महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
पेट की चर्बी को कम करता है
पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
रात को नींद अच्छी आती है

इसे भी पढ़ेंः बॉडी लूजनिंग और फैट बर्निंग के लिए जरूर करें ये योगासन, रीढ़ की हड्डी भी होती है मजबूत

ये लोग कपालभारती न करें
प्रेग्नेंट महिलाओं को इसे करने से बचना चाहिए
जिनकी कोई सर्जरी हुई हो वह इसे न करें
गैसट्रिक और एसिटिडी वाले पेशेंट्स इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करें.
पीरियड्स में बिल्कुल न करें.
हाई बीपी और हार्ट संबंधी रोगों के पैशेंट्स इसे करने से बचें.
अनुलोम विलोम प्राणायाम: सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
फेफड़े मजबूत होते हैं
बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
वजन कम करने में मददगार
पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
गठिया के लिए भी फायदेमंद





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *